कैंसर का नाम सुनना ही किसी भी महिला के लिए भावनात्मक रूप से कठिन अनुभव हो सकता है। इसके बाद कीमोथेरेपी शुरू होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। हर महिला में इनका असर एक जैसा नहीं होता। यह कीमोथेरेपी की दवा, उसकी मात्रा, उपचार की अवधि, उम्र और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
बालों का झड़ना सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला बदलाव हो सकता है। सिर के बालों के साथ भौंहों, पलकों और शरीर के अन्य हिस्सों के बाल भी कम हो सकते हैं। इसके अलावा त्वचा में रूखापन या रंग में बदलाव और नाखूनों में परिवर्तन भी हो सकते हैं। हालांकि, कई महिलाओं में उपचार पूरा होने के बाद बाल दोबारा उगने लगते हैं।
थकान और कमजोरी कीमोथेरेपी के दौरान बहुत आम हैं। महिला को सामान्य काम करने में भी अधिक ऊर्जा खर्च होती महसूस हो सकती है। कभी-कभी एनीमिया या रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने से भी थकान बढ़ सकती है। मतली, उल्टी, भूख में बदलाव, कब्ज या दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
पीरियड्स और हार्मोन में बदलाव
महिलाओं के लिए कीमोथेरेपी का एक महत्वपूर्ण प्रभाव मासिक धर्म और हार्मोनल बदलाव से जुड़ा हो सकता है। कुछ महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या उपचार के दौरान पूरी तरह रुक सकते हैं। कुछ मामलों में यह बदलाव अस्थायी होता है और पीरियड्स बाद में वापस आ सकते हैं, जबकि कुछ महिलाओं में समय से पहले मेनोपॉज हो सकता है।
हार्मोन में कमी के कारण हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना, नींद में परेशानी, मूड में बदलाव और योनि में सूखापन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। योनि में सूखापन या संवेदनशीलता के कारण यौन संबंधों के दौरान असहजता या दर्द हो सकता है।
प्रजनन क्षमता पर असर
कीमोथेरेपी अंडाशय में मौजूद उन कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकती है जो अंडाणुओं से संबंधित होती हैं। इसलिए कुछ महिलाओं में फर्टिलिटी यानी गर्भधारण की क्षमता कम हो सकती है। यह प्रभाव उम्र, कीमोथेरेपी की दवाओं और उनकी मात्रा सहित कई कारकों पर निर्भर करता है और अस्थायी भी हो सकता है या स्थायी भी।
इसलिए यदि महिला भविष्य में मां बनना चाहती है, तो कीमोथेरेपी शुरू होने से पहले ही डॉक्टर से फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के विकल्पों पर बात करना जरूरी है। कुछ मामलों में अंडाणु या भ्रूण को सुरक्षित रखने जैसे विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पीरियड्स रुक जाने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि गर्भधारण की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। उपचार के दौरान गर्भधारण से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रभावी गर्भनिरोध का इस्तेमाल करना जरूरी हो सकता है, क्योंकि कई कीमोथेरेपी दवाएं गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मन पर भी पड़ता है असर
कीमोथेरेपी केवल शरीर को नहीं, बल्कि भावनाओं और आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकती है। बालों का झड़ना, शरीर में बदलाव, कमजोरी, भविष्य की चिंता और उपचार की अनिश्चितता के कारण चिंता, उदासी, चिड़चिड़ापन या अपने शरीर को लेकर असहजता महसूस होना संभव है। ध्यान और एकाग्रता में परेशानी यानी “chemo brain” भी कुछ मरीजों में देखने को मिल सकता है।
ऐसे समय में महिला को यह समझना जरूरी है कि ये भावनाएं कमजोरी का संकेत नहीं हैं। परिवार का भावनात्मक सहयोग, डॉक्टर से खुलकर बातचीत और आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग मददगार हो सकती है।
हर बदलाव को सहना जरूरी नहीं
कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले कई साइड इफेक्ट्स को दवाओं, पोषण, आराम और उचित चिकित्सकीय देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए किसी भी नए या परेशान करने वाले लक्षण को छिपाने के बजाय अपनी कैंसर-केयर टीम को बताना चाहिए। संक्रमण के संकेत, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात—कीमोथेरेपी के दौरान शरीर में बदलाव आना उपचार की एक चुनौती हो सकती है, लेकिन यह महिला की पहचान या सुंदरता को कम नहीं करता। इस दौर में खुद के प्रति धैर्य रखें, मदद स्वीकार करें और अपने डॉक्टर से हर सवाल पूछें। सही जानकारी और सही देखभाल उपचार की यात्रा को थोड़ा आसान बना सकती है।
यह लेख सामान्य जागरूकता के लिए है। कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स और उनके उपचार व्यक्ति तथा दवा के अनुसार अलग हो सकते हैं; अपनी स्थिति के लिए अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह को प्राथमिकता दें।