“मैं बच गया… पर क्या सच में?”
13 अप्रैल 1919… जलियांवाला बाग की वह दर्दनाक घटना जिसने न सिर्फ सैकड़ों लोगों की जान ली, बल्कि अनगिनत परिवारों की खुशियां भी छीन लीं। एक प्रत्यक्षदर्शी की नज़र से पढ़िए उस दिन की सच्चाई—जहाँ गोलियों की गूंज के साथ इंसानियत भी घायल हो गई थी।