हनुमान जयंती भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में बड़े श्रद्धा और उत्साह से मनाई जाती है। यह दिन उनकी शक्ति, भक्ति और भगवान राम के प्रति अटूट समर्पण को याद करने के लिए समर्पित है।
अधिकतर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है (मार्च–अप्रैल के आसपास)। हालांकि, कुछ राज्यों में अलग-अलग तिथियों पर भी इसे मनाया जाता है।
इस दिन क्या करते हैं?
- सुबह स्नान कर व्रत रखा जाता है
- मंदिर में जाकर हनुमान जी की पूजा की जाती है
- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया जाता है
- सिंदूर, चमेली का तेल और लड्डू का भोग लगाया जाता है
धार्मिक दृष्टिकोण
धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण में हनुमान जी को वानर रूप में दिखाया गया है—
- उनका चेहरा और रूप बंदर जैसा बताया गया है
- लेकिन उनकी बुद्धि, शक्ति और ज्ञान असाधारण थे
- वे भगवान राम के परम भक्त और सहयोगी थे
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific View):
कुछ इतिहासकार और शोधकर्ता मानते हैं कि “वानर” कोई बंदर नहीं,
बल्कि एक प्राचीन जनजाति (tribe) थी—
- जो जंगलों में रहती थी
- जिनकी पहचान अलग पहनावे या प्रतीकों जैसे पूंछ से होती थी
- और जो बेहद फुर्तीले और ताकतवर योद्धा थे
👉कुछ विद्वान इसे बंदर जैसे दिखने वाले, लेकिन बुद्धिमान और शक्तिशाली प्राणी मानते हैं
वन + नर → यानी वन में रहने वाले मनुष्य (एक विशेष जाति/समुदाय)
हनुमानजी का जन्म कैसे हुआ?
पुराणों के अनुसार, हनुमानजी का जन्म माता अंजनी माता और पिता केसरी के घर हुआ था। कथा के अनुसार, अंजनी माता ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके अंश से पुत्र प्राप्त करेंगी।
इसी समय पवन देव (वायु देव) के माध्यम से दिव्य प्रसाद अंजनी माता तक पहुँचा, जिससे हनुमानजी का जन्म हुआ। इसलिए उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है।
बाल्यकाल में हनुमानजी बहुत ही चंचल और शक्तिशाली थे। एक दिन उन्होंने उगते हुए सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की। इससे पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया।
तब इंद्र देव ने वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमानजी की ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी और वे बेहोश हो गए।
यह देखकर पवन देव क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरे संसार में वायु प्रवाह रोक दिया। इससे जीव-जगत संकट में पड़ गया।
तब सभी देवताओं ने मिलकर हनुमानजी को जीवित किया और उन्हें अनेक वरदान दिए—
- असीम बल और बुद्धि
- किसी भी रूप में परिवर्तन करने की शक्ति
- अमरता का आशीर्वाद
इसी कारण उनका नाम पड़ा हनुमान (हनु + मान)।
हनुमानजी को भगवान शिव का रुद्र अवतार माना जाता है, जो धरती पर भगवान राम की सहायता के लिए अवतरित हुए थे।हनुमानजी को संकटमोचन कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से:
- जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं
- भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है