Truth Behind Traditions :Good Friday की कहानी

यह घटना Jerusalem नाम के शहर में हुई थी, जो आज के Israel में स्थित है।

इतिहासकारों के अनुसार, यह घटना लगभग 30 से 33 ईस्वी (AD) के बीच हुई थी।

हर साल इस दिन को Good Friday के रूप में याद किया जाता है, जो कि Easter से ठीक पहले आने वाला शुक्रवार होता है।

लगभग 2000 साल पहले , यीशु मसीह (Jesus Christ) लोगों को प्यार, दया और सच्चाई का रास्ता सिखाते थे। वे कहते थे -सबसे प्यार करो , किसी से नफरत मत करो और जरूरतमंद की मदद करो।

उनकी बातें सुनकर बहुत लोग उनके अनुयायी बन गए, लेकिन कुछ लोग उनसे नाराज़ भी हो गए।

उस समय के कुछ शासकों और धर्मगुरुओं को लगा कि यीशु लोगों को उनके खिलाफ भड़का रहे हैं।
इसलिए उन्होंने उन्हें सजा देने का फैसला किया। यीशु को गिरफ्तार किया गया, उन्हें बहुत कष्ट दिया गया और अंत में उन्हें सूली (Cross) पर चढ़ा दिया गया।इस घटना को “Crucifixion” कहा जाता है।

सबसे खास बात यह है कि जब यीशु को सूली पर चढ़ाया जा रहा था, तब भी उन्होंने किसी के लिए बुरा नहीं सोचा।

उन्होंने भगवान से कहा:
“हे पिता, इन्हें माफ कर देना, ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।”

सोचिए… इतना दर्द सहने के बाद भी उन्होंने माफ करना सिखाया

👉 क्योंकि इस दिन यीशु ने हमें त्याग (sacrifice) और माफी (forgiveness) की सबसे बड़ी सीख दी
👉 उन्होंने दिखाया कि सच्चाई और प्यार कभी हारते नहीं
👉 उनका बलिदान लोगों के लिए उम्मीद और विश्वास का संदेश बन गया

इसलिए इस दिन को “Good Friday” कहा जाता है 💫

भारत में Good Friday की छुट्टी कब शुरू हुई?

जब भारत पर United Kingdom (ब्रिटिश शासन) का राज था (लगभग 18वीं–20वीं सदी), तब उन्होंने अपने कई धार्मिक त्योहारों को भी सरकारी मान्यता दी। उसी समय Good Friday को भी सरकारी छुट्टी (public holiday) घोषित किया गया। सरकारी दफ्तर और संस्थान इस दिन बंद रखे जाते थे।

Navchetna Insight

भारत की खूबसूरती यही है कि यहाँ हर धर्म के त्योहार को सम्मान मिलता है ❤️

Good Friday की छुट्टी हमें सिर्फ आराम नहीं, बल्कि प्यार, त्याग और माफी की सीख भी देती है

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